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डर के आगे जीत है – Moral Story in hindi

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Moral story in hindi

डर के आगे जीत है – Moral Story in hindi

Story– एक बार एक चरवाहा कुछ बकरियों को लेकर जंगल में चरवाने के लिए लेकर जाता है। ग़लती से एक बकरी और उसके दो बच्चे जंगल में ही छूट जाते है। बकरी पहले थोड़ा घबराती है क्योंकि बकरी अच्छे से जानती है कि जंगल में शेर है और आज की रात बकरी उसका खाना बनने वाली है। बकरी को अपनी मौत का डर सताने लगता है। माँ को डरा देखकर बकरी के बच्चे भी डर जाते है। बच्चों को डरा देख कर बकरी एक योजना बनाती है शेर से बचने के लिए।
बकरी ये योजना अपने बच्चों को अच्छी तरह समझा देती है। बच्चों को योजना सुनकर थोड़ी तसल्ली मिलती है। शाम को शेर के शिकार करने का समय आता है। शेर जैसे ही अपनी गुफा से बाहर निकलता है, बकरी चुपके से अपने दोनो बच्चों को लेकर शेर की गुफा में जाकर छुप जाती है। एक पेड़ पर बैठा बंदर यह सब कुछ देख लेता है। शेर सारा जंगल छान मारता है। शेर को कोई भी शिकार खाने को नहीं मिलता। शेर थक हार कर वापिस गुफा की तरफ़ लौट रहा होता है। तभी पेड़ पर बैठा बंदर शेर को बताता है, कि गुफा में बकरी अपने दो बच्चों के साथ छुपी हुई है। शेर को विश्वास ही नहीं होता, शेर बंदर को कहता है बकरी की इतनी हिम्मत हो ही नहीं सकती।
बंदर शेर को कहता है, मेरा यक़ीन मानो बकरी अंदर गुफा में है। मैं सच बोल रहा हू। शेर इस पर ख़ुश हो जाता है। अच्छा -आज तो फिर मेरी दावत हो जायेगी। बकरी और उसके बच्चों को जैसे ही पता लगता है कि शेर गुफा के बाहर खड़ा है। बकरी और उसके बच्चे डर जाते है।बकरी अपने बच्चों को कहती है। हमने जैसे प्लान बनाया है तुम बिना डरे वैसे ही करना।
शेर जैसे ही क़दम गुफा के अंदर बढ़ाने लगता है। अंदर से आवाज़ आती है, माँ-माँ हमें बहुत भूख लगी है। बकरी बच्चों से कहती है। थोड़ा धीरज रखो अभी शेर मामा आयेंगे हम सब उनको नोच-नोच खायेंगे। शेर ये सुनकर डर जाता है। शेर बंदर को फटकार लगाता है, सच बता -अंदर गुफा में कौन है? बंदर फिर आश्वासन देता है, अंदर बकरी ही है। शेर बंदर को ग़ुस्से से कहता है, हो ही नहीं सकता। बकरी की इतनी हिम्मत नहीं हो सकती कि वो मेरी गुफा में चली आये और मेरे अंदर आने का इंतज़ार करे। बंदर कहता है। मैं सच बोल रहा हू अंदर बकरी ही है। शेर बंदर से कहता है, अगर ये सच है तो तू भी मेरे साथ अंदर चल, शेर को अंदर जाते वक़्त डर लग रहा था। इसलिए शेर ने बंदर को अपने साथ चलने को कहा। बंदर कही भाग ना जाये इसलिए शेर ने बंदर का हाथ पकड़ लिया। शेर डरा हुआ था। शेर को डर था कि उस से भी ताक़तवर कोई जानवर उसकी गुफा के अंदर है। शेर की आगे बढ़ने की हिम्मत नहीं हो पा रही थी। शेर ने जैसे ही थोड़ा गुफा के अंदर क़दम बढ़ाया तो दोबारा आवाज़ आयी।
माँ-माँ बहुत भूख लगी है, अब इंतज़ार नहीं होता। बकरी ने जैसे ही शेर और बंदर की परछाईं देखी तो बकरी का ध्यान गया कि शेर ने बंदर को पकड़ा हुआ है। बकरी ने बच्चों से कहा, वो देखो -बंदर चाचा शेर मामा को पकड़ कर ले आये है। अब हम शेर को नोच-नोच कर बोटी बोटी अलग करके खायेंगे। ये सुनकर शेर को लगा कि बंदर उसको किसी का शिकार बनाने के लिए गुफा के अंदर लेकर जा रहा है और शेर वहाँ से दुम दबाकर भाग निकला। शेर के साथ साथ बंदर भी भाग गया। बकरी और उसके बच्चों की जान बच गयी।

Moral of the story – शेर को डर लगा, जब उसे पता लगा कि उससे भी ज़्यादा ताक़तवर कोई जानवर उसकी गुफा में है। ये शेर के लिये एक नया तजुर्बा था। शेर ने कभी भी ऐसी परिस्थिति का सामना किया ही नहीं था। वही दूसरी और बकरी देखने में शेर से बहुत कमज़ोर थी, लेकिन परिणाम की चिंता किये बग़ैर बकरी ने अपना कर्म किया। जब बकरी गुफा के अंदर थी। बकरी ने अपना बेस्ट दिया। बकरी ने केवल ये सोचा कि वो इस समय क्या कर सकती है, अपनी और अपने बच्चों की जान बचाने के लिए। उसने एक बार भी नहीं सोचा, कि अगर वो नाकामयाब हो गयी तो उसका क्या होगा। बकरी ने फल की चिंता ही नहीं की। बस अपने डर को भूलकर अपने कर्म से वो कर डाला जो असंभव था।

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